बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी चरम पर है। इस बीच, सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि JDU ने चुनाव आयोग से बिहार में इस बार एक ही चरण में चुनाव कराने की मांग की है। झा के अनुसार, एक चरण में मतदान से न केवल प्रशासनिक कार्य आसान होगा, बल्कि इससे सरकारी खर्च भी कम होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग का जो भी फैसला होगा, JDU उसका सम्मान करेगी और पूरी तरह तैयार है।
संजय झा ने कहा कि इस बार बिहार का चुनावी माहौल पहले से काफी अलग है। अब वोट जात-पात के आधार पर नहीं, बल्कि विकास और नीतियों के आधार पर पड़ेंगे। उन्होंने बताया कि JDU नेता विधानसभा क्षेत्रों में जनता के बीच जाकर नीतीश कुमार के विकास कार्यों और नीतियों का प्रचार कर रहे हैं। झा ने विशेष रूप से जोर दिया कि बिहार की जनता अब महिला वोटरों की राय को महत्व देती है और इस बार महिलाओं का वोट निर्णायक साबित होगा।
JDU और एनडीए गठबंधन का लक्ष्य इस बार प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाना है। संजय झा ने कहा कि यह चुनाव बिहार के अगले 25 सालों का भविष्य तय करेगा। उन्होंने दावा किया कि जनता अब सिर्फ विकास के आधार पर फैसला लेगी और जातीय समीकरण इस बार हावी नहीं होंगे।
सीट बंटवारे को लेकर संजय झा ने कहा कि एनडीए के भीतर इस मुद्दे पर कोई विवाद नहीं है और जल्द ही सीट शेयरिंग की घोषणा कर दी जाएगी। उन्होंने बताया, “अगले दो-तीन दिनों में फैसला हो जाएगा और सभी दलों की सहमति के साथ यह जनता के सामने आएगा। एनडीए के सभी दल चाहते हैं कि गठबंधन भारी बहुमत से सरकार बनाए।” उन्होंने कहा कि हर दल की अपनी आकांक्षाएं हैं, लेकिन सभी का साझा मकसद बिहार के भविष्य को और मजबूत करना है।
झा ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि इसका असर इस चुनाव में साफ दिखेगा। उन्होंने दावा किया कि इस बार जनता, खासकर महिलाएं, सोच-समझकर अपने मत का इस्तेमाल करेंगी। उनका मानना है कि यह चुनाव विकास, सुशासन और नई नीतियों पर केंद्रित होगा।
चुनाव आयोग से एक चरण में मतदान की मांग को महत्वपूर्ण बताते हुए झा ने कहा कि इससे प्रशासनिक प्रक्रिया सरल होगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। साथ ही, कम खर्च में चुनाव संपन्न होगा, जो जनहित में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार में चुनाव एक लोकतांत्रिक उत्सव की तरह होना चाहिए, जिसमें जनता को अपने मताधिकार का पूर्ण अवसर मिले।